"अर्थ"
"अर्थ"
चांदण्याही विझलेल्या
चंद्रही जणू निजलेला
सावळले नभ सारे
गाती वाहते वारे
------------------तू कुठे?!!१
थेंब थेंब शिडकावा
कुठूनसा हळु व्हावा
वाऱ्याच्या कुणी पाठी
झाडे का झिंगताती
---------------------तू कुठे?!!२
कसली ही झाली नशा
धुंद जशा दाही दिशा
पंखाविन तरल तनु
अवकाशी झेपे जणु
---------------------तू कुठे?!!३
जिवनाचा अर्थ नवा
चराचरा उमगावा
या हळव्या क्षणी जरा
स्पर्श हवा प्रेमभरा
--------------------तू कुठे?!!४
. ..... मी मानसी