Submitted by पद्मजा_जो on 30 November, 2011 - 01:21 गुलमोहर: डिजिटल आर्टशेअर कराwhatsappfacebooktwittergoogle+pinterestemail Pages1 2 पुढे > शेवट » व्वा मस्तच , अप्रतिम जमलय व्वा मस्तच , अप्रतिम जमलय Submitted by ईनमीन तीन on 30 November, 2011 - 01:28 Log in or register to post comments वॉव...!! वॉव...!! Submitted by A M I T on 30 November, 2011 - 01:30 Log in or register to post comments अप्रतीम सुंदर पर्वतांचे अप्रतीम सुंदर पर्वतांचे प्रतिबिंब मस्त दाखवलंय पाण्यात. Submitted by मंदार-जोशी on 30 November, 2011 - 01:32 Log in or register to post comments भारी!! भारी!! Submitted by आनंदयात्री on 30 November, 2011 - 01:38 Log in or register to post comments मस्तच एकदम मस्तच एकदम Submitted by मयुरी. on 30 November, 2011 - 01:42 Log in or register to post comments धन्यवाद सगळ्यांना धन्यवाद सगळ्यांना Submitted by पद्मजा_जो on 30 November, 2011 - 02:17 Log in or register to post comments सुंदर. सुंदर. Submitted by जागू-प्राजक्ता-... on 30 November, 2011 - 02:32 Log in or register to post comments आकाशाचं प्रतिबिंब जास्त आकाशाचं प्रतिबिंब जास्त आवडलं, पाण्यात आकाश जरी गडद दाखवले असशील (पाण्याचा मुळचा निळसर रंग आणि निळे आकाश) , तरी ढग फिके दिसतील ना? प्रत्यक्षात दिसणार्या ढगांपेक्षाही प्रतिबिंबात ढग धूसर दिसतात सहसा... Submitted by बागेश्री on 30 November, 2011 - 02:38 Log in or register to post comments छान च छान च Submitted by स्मितू on 30 November, 2011 - 02:39 Log in or register to post comments मस्त पद्मजा मस्त पद्मजा Submitted by मी_चिऊ on 30 November, 2011 - 02:50 Log in or register to post comments धन्यवाद सगळ्यांना.. धन्यवाद सगळ्यांना.. बागेश्री..तु म्हणतेस ते बरोबर आहे..पण मला ते ढगांचं प्रतिबिंब तेवढंसं नीट जमत नव्हतं, पाणी गडद होत राहिलं... मग ते प्रतिबिंब कमीच ठेवलं... अगदी ना के बराबर Submitted by पद्मजा_जो on 30 November, 2011 - 03:13 Log in or register to post comments अप्रतिम ग पद्मजा.. अप्रतिम ग पद्मजा.. Submitted by दक्षिणा on 30 November, 2011 - 23:27 Log in or register to post comments मस्त!! मस्त!! Submitted by -शाम on 30 November, 2011 - 23:27 Log in or register to post comments पजो मस्तच खुप छान पजो मस्तच खुप छान काढलेस. थोडीशी माहीती पण देत जा कि, जसे की सॉफ्टवेअर कुठले युज केलेस..... आम्हालाही माहीती होईल त्या निमीत्ताने Submitted by किश्या on 30 November, 2011 - 23:29 Log in or register to post comments सुंदर. सुंदर. Submitted by दिनेश. on 30 November, 2011 - 23:43 Log in or register to post comments अ प्र ति म. अ प्र ति म.:) Submitted by टोकूरिका on 30 November, 2011 - 23:43 Log in or register to post comments सुंदर ! सुंदर ! Submitted by मुक्तेश्वर कुळकर्णी on 1 December, 2011 - 00:18 Log in or register to post comments छान! छान!:) Submitted by हर्षदा परब on 1 December, 2011 - 04:24 Log in or register to post comments सगळ्यांचे मनापासून आभार... सगळ्यांचे मनापासून आभार... Submitted by पद्मजा_जो on 4 December, 2011 - 23:49 Log in or register to post comments छान छान Submitted by UlhasBhide on 6 December, 2011 - 07:29 Log in or register to post comments अप्रतिम अप्रतिम Submitted by मनीष कदम on 7 December, 2011 - 02:53 Log in or register to post comments मस्तच. मस्तच. Submitted by शोभा१ on 17 December, 2011 - 01:19 Log in or register to post comments मस्त जमलय! मस्त जमलय! Submitted by Vega on 17 December, 2011 - 01:57 Log in or register to post comments जो, मस्त जमलय गं... जो, मस्त जमलय गं... Submitted by भुंगा on 17 December, 2011 - 02:00 Log in or register to post comments धन्यवाद उकाका, मनीश कदम, धन्यवाद उकाका, मनीश कदम, शोभा, बित्तुबंगा, भुंगा Submitted by पद्मजा_जो on 17 December, 2011 - 03:12 Log in or register to post comments पजो.........छानच जमलंय! पजो.........छानच जमलंय! Submitted by मानुषी on 17 December, 2011 - 03:37 Log in or register to post comments धन्स मानुषी धन्स मानुषी Submitted by पद्मजा_जो on 17 December, 2011 - 03:44 Log in or register to post comments छानच!! छानच!! Submitted by अंशा on 18 December, 2011 - 13:48 Log in or register to post comments पद्मजा मस्तच गं. खरंच ऑईल पद्मजा मस्तच गं. खरंच ऑईल पेंटींग वाटतय. फोटोशॉप का? Submitted by नीलू on 18 December, 2011 - 14:06 Log in or register to post comments मस्तच ग पजो मस्तच ग पजो Submitted by मयुरी. on 22 December, 2011 - 13:16 Log in or register to post comments Pages1 2 पुढे > शेवट »
व्वा मस्तच , अप्रतिम जमलय व्वा मस्तच , अप्रतिम जमलय Submitted by ईनमीन तीन on 30 November, 2011 - 01:28 Log in or register to post comments
वॉव...!! वॉव...!! Submitted by A M I T on 30 November, 2011 - 01:30 Log in or register to post comments
अप्रतीम सुंदर पर्वतांचे अप्रतीम सुंदर पर्वतांचे प्रतिबिंब मस्त दाखवलंय पाण्यात. Submitted by मंदार-जोशी on 30 November, 2011 - 01:32 Log in or register to post comments
भारी!! भारी!! Submitted by आनंदयात्री on 30 November, 2011 - 01:38 Log in or register to post comments
मस्तच एकदम मस्तच एकदम Submitted by मयुरी. on 30 November, 2011 - 01:42 Log in or register to post comments
धन्यवाद सगळ्यांना धन्यवाद सगळ्यांना Submitted by पद्मजा_जो on 30 November, 2011 - 02:17 Log in or register to post comments
सुंदर. सुंदर. Submitted by जागू-प्राजक्ता-... on 30 November, 2011 - 02:32 Log in or register to post comments
आकाशाचं प्रतिबिंब जास्त आकाशाचं प्रतिबिंब जास्त आवडलं, पाण्यात आकाश जरी गडद दाखवले असशील (पाण्याचा मुळचा निळसर रंग आणि निळे आकाश) , तरी ढग फिके दिसतील ना? प्रत्यक्षात दिसणार्या ढगांपेक्षाही प्रतिबिंबात ढग धूसर दिसतात सहसा... Submitted by बागेश्री on 30 November, 2011 - 02:38 Log in or register to post comments
मस्त पद्मजा मस्त पद्मजा Submitted by मी_चिऊ on 30 November, 2011 - 02:50 Log in or register to post comments
धन्यवाद सगळ्यांना.. धन्यवाद सगळ्यांना.. बागेश्री..तु म्हणतेस ते बरोबर आहे..पण मला ते ढगांचं प्रतिबिंब तेवढंसं नीट जमत नव्हतं, पाणी गडद होत राहिलं... मग ते प्रतिबिंब कमीच ठेवलं... अगदी ना के बराबर Submitted by पद्मजा_जो on 30 November, 2011 - 03:13 Log in or register to post comments
अप्रतिम ग पद्मजा.. अप्रतिम ग पद्मजा.. Submitted by दक्षिणा on 30 November, 2011 - 23:27 Log in or register to post comments
पजो मस्तच खुप छान पजो मस्तच खुप छान काढलेस. थोडीशी माहीती पण देत जा कि, जसे की सॉफ्टवेअर कुठले युज केलेस..... आम्हालाही माहीती होईल त्या निमीत्ताने Submitted by किश्या on 30 November, 2011 - 23:29 Log in or register to post comments
अ प्र ति म. अ प्र ति म.:) Submitted by टोकूरिका on 30 November, 2011 - 23:43 Log in or register to post comments
सुंदर ! सुंदर ! Submitted by मुक्तेश्वर कुळकर्णी on 1 December, 2011 - 00:18 Log in or register to post comments
सगळ्यांचे मनापासून आभार... सगळ्यांचे मनापासून आभार... Submitted by पद्मजा_जो on 4 December, 2011 - 23:49 Log in or register to post comments
अप्रतिम अप्रतिम Submitted by मनीष कदम on 7 December, 2011 - 02:53 Log in or register to post comments
मस्त जमलय! मस्त जमलय! Submitted by Vega on 17 December, 2011 - 01:57 Log in or register to post comments
जो, मस्त जमलय गं... जो, मस्त जमलय गं... Submitted by भुंगा on 17 December, 2011 - 02:00 Log in or register to post comments
धन्यवाद उकाका, मनीश कदम, धन्यवाद उकाका, मनीश कदम, शोभा, बित्तुबंगा, भुंगा Submitted by पद्मजा_जो on 17 December, 2011 - 03:12 Log in or register to post comments
पजो.........छानच जमलंय! पजो.........छानच जमलंय! Submitted by मानुषी on 17 December, 2011 - 03:37 Log in or register to post comments
धन्स मानुषी धन्स मानुषी Submitted by पद्मजा_जो on 17 December, 2011 - 03:44 Log in or register to post comments
पद्मजा मस्तच गं. खरंच ऑईल पद्मजा मस्तच गं. खरंच ऑईल पेंटींग वाटतय. फोटोशॉप का? Submitted by नीलू on 18 December, 2011 - 14:06 Log in or register to post comments
मस्तच ग पजो मस्तच ग पजो Submitted by मयुरी. on 22 December, 2011 - 13:16 Log in or register to post comments
व्वा मस्तच , अप्रतिम जमलय
व्वा मस्तच , अप्रतिम जमलय
वॉव...!!
वॉव...!!
अप्रतीम सुंदर पर्वतांचे
अप्रतीम सुंदर
पर्वतांचे प्रतिबिंब मस्त दाखवलंय पाण्यात.
भारी!!
भारी!!

मस्तच एकदम
मस्तच एकदम
धन्यवाद सगळ्यांना
धन्यवाद सगळ्यांना
सुंदर.
सुंदर.
आकाशाचं प्रतिबिंब जास्त
आकाशाचं प्रतिबिंब जास्त आवडलं, पाण्यात आकाश जरी गडद दाखवले असशील (पाण्याचा मुळचा निळसर रंग आणि निळे आकाश) , तरी ढग फिके दिसतील ना? प्रत्यक्षात दिसणार्या ढगांपेक्षाही प्रतिबिंबात ढग धूसर दिसतात सहसा...
छान च
छान च
मस्त पद्मजा
मस्त पद्मजा
धन्यवाद सगळ्यांना..
धन्यवाद सगळ्यांना..
बागेश्री..तु म्हणतेस ते बरोबर आहे..पण मला ते ढगांचं प्रतिबिंब तेवढंसं नीट जमत नव्हतं, पाणी गडद होत राहिलं... मग ते प्रतिबिंब कमीच ठेवलं... अगदी ना के बराबर
अप्रतिम ग पद्मजा..
अप्रतिम ग पद्मजा..
मस्त!!
मस्त!!
पजो मस्तच खुप छान
पजो मस्तच खुप छान काढलेस.
थोडीशी माहीती पण देत जा कि, जसे की सॉफ्टवेअर कुठले युज केलेस.....
आम्हालाही माहीती होईल त्या निमीत्ताने
सुंदर.
सुंदर.
अ प्र ति म.
अ प्र ति म.:)
सुंदर !
सुंदर !
छान!
छान!:)
सगळ्यांचे मनापासून आभार...
सगळ्यांचे मनापासून आभार...
छान
छान
अप्रतिम
अप्रतिम
मस्तच.
मस्तच.
मस्त जमलय!
मस्त जमलय!
जो, मस्त जमलय गं...
जो, मस्त जमलय गं...
धन्यवाद उकाका, मनीश कदम,
धन्यवाद उकाका, मनीश कदम, शोभा, बित्तुबंगा, भुंगा

पजो.........छानच जमलंय!
पजो.........छानच जमलंय!
धन्स मानुषी
धन्स मानुषी
छानच!!
छानच!!
पद्मजा मस्तच गं. खरंच ऑईल
पद्मजा मस्तच गं.
खरंच ऑईल पेंटींग वाटतय. फोटोशॉप का?
मस्तच ग पजो
मस्तच ग पजो
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