Bspujari
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| Wednesday, September 14, 2005 - 3:28 am: |
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AiBairka ik AiBa`ka ? AiBa h ]psaga- "cyaa idXaolaaÊ cyaa kDo " AXyaa Aqaa-nao vaaprlaa jaatÜ... tsaoca iËyaapdacaI ikMvaa naamaacaI tIva`ta /p`Baava daKivaNao (asaazIhI %yaacaa vaapr krtat.
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Swasti
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| Thursday, September 15, 2005 - 10:52 am: |
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to Ôar baD p`sqa Aaho ho kuiNa ihndI iknvaa einglaXa maQyao Anauvaidt kÉ Xakola ka Æ [qao p`sqa mhNajao mahana vyai> Asa Apoi@Xat naahI Aaho
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Dineshvs
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| Thursday, September 15, 2005 - 2:44 pm: |
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vah bahut baDI hist hOÊ ho caalaola ka Æ pNa ho vya>Icyaa baabatItca mhNata yaola.
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Swasti
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| Friday, September 16, 2005 - 2:44 am: |
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hÜ malaahI vyai>cyaa baabaitca baÜlaayaca Aaho pNa jaonvha ha Xbd\p`yaÜga krtÜ tonvha ja$ir naih kI it vyai> KrÜKr ga`oT Asaola baDo p`sqa yaa Xabdat ek ]prÜiQaktoicaih CTa Aaho jaI baDI hist maQyao idsat nahI
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Dineshvs
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| Friday, September 16, 2005 - 4:19 pm: |
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Aba vah zhro baDI histÊ ikMvaa }naka @yaaÊ vah tÜ hO }Mcao laÜga. maQao Aaho ka tÜ }prÜQa Æ
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Bee
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| Wednesday, November 09, 2005 - 6:01 am: |
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kÜprKLI maarNao mhNajao kayaÆ kXaI maartat tIÆ
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Karadkar
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| Wednesday, November 09, 2005 - 6:24 am: |
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kÜprKLI mhNajao kÜpranao hLuca Xaojaarcyaalaa Qa@ka doNao ikMvaa ZÜsaNao. kdacaIt tÜ Qa@ka pÜTat laagauna KLI pDt Asaola mhNauna kÜprKLI mhNat Asaavaot. 
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Saanjya
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| Thursday, November 10, 2005 - 2:32 am: |
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Bee, kÜNaalaa maartÜ Aahosa kÜprKLIÆ Â´
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Bee
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| Thursday, November 10, 2005 - 2:56 am: |
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basamaQao daTI JaalaI kI kÜprKLI maarayacaI Xa@yatÜvar maulaIMnaa
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Karadkar
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| Thursday, November 10, 2005 - 6:00 am: |
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baIÊ Aata maa~ tu na@kI maar KaNaar madam kZuna ²²² 
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kÜprKLI hI XabdIkca Asato Asao maJao trI mat hÜtoÆ tI KrI qaÜDIca dota yaotoÆ
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Bee
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| Friday, November 11, 2005 - 4:08 am: |
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rcanaaÊ pakklaocyaa AaiNa pIpIcyaa baIbaI tumhI ekmaokaMnaa XaabdIk kÜprKoLIca tr dot Asata. jasao kI
maoqaIcyaa zoplyaacaI ÌtI hvaI AahoÊ kuNaavar trI impression maarayacao Aaho Asao mhMTlyaavar lagaoca Aca- mhNato kuNaavar gaMÆ hI Kro tr kÜprKLIca JaalaI. tsaoca ]pasa mhNatÜ AamhI dÜGao AQaa- AQaa- kp caha Gao}.. tr %yaavar ]<ar yaoto.. AQyaa- kpavar gaÜYT
AalaI ho Aamhalaa maaihtI navhtM hM .. hI doKIla XaabdIk kÜprKLIca JaalaI
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Bee
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| Thursday, December 15, 2005 - 4:15 am: |
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शब्दप्रेमींनो, पु. शि. रेगेंच्या बीबीवर जरा चक्कर माराल का?
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Bee
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| Friday, February 03, 2006 - 4:16 pm: |
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बिपिन ह्या बंगाली नावाचा अर्थ कुणाला माहिती आहे का?
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Champak
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| Friday, February 03, 2006 - 5:26 pm: |
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asami la vichar ki 
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Storvi
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| Friday, February 03, 2006 - 5:40 pm: |
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का तो बंगाली डिक्शनरी आहे का? अरे त्याचा अर्थ बाग हो ना?
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Vaatsaru
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| Saturday, February 04, 2006 - 3:12 pm: |
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बाग नव्हे ग, त्याचा अर्थ आहे जंगल', अर्थात ह्याचा असाम्याशी' संबंध नसावा 
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Bee
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| Saturday, February 04, 2006 - 4:03 pm: |
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धन्यवाद! बिपीन उर्फ़ असामि, हे पोष्ट वाचत असशील तर तुच सांग नक्की अर्थ कुठला, बाग की जंगल की अजून काहीतरी वेगळा. मुलाचे नाव म्हणून जंगल असा अर्थ घेणे थोडे अप्रिय वाटते. पण जंगलाचे प्रतिशब्द फ़ार गोड आहेत, जसे की अर्णव, वन, वनराई, रान. आयुष्यात सदासर्वकाळ हिरवळ, बहर असणे अशा अर्थी तर नसेल ना हे नाव? काही clue मिळत नाही. जाऊ दे..
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Saanjya
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| Saturday, February 04, 2006 - 10:03 pm: |
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ibapIna ho naava ivaipna yaa naavaacao baoMgaalaI Ép AahoÊ pNa Aata malaa ivaipna caa Aqa- Aazvat naahIyao
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Maitreyee
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| Saturday, February 04, 2006 - 10:37 pm: |
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विपिन चा अर्थ अरण्य, जंगल असे मला आठवत आहे.. CBDG..
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Mahaguru
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| Sunday, February 05, 2006 - 7:25 am: |
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saanjya आणि मैत्रेयी चे बरोबर आहे. बिपीन हा शब्द विपिन पासुन आला आहे. विपिन म्हणजे जंगल http://www.behindthename.com/php/view.php?name=bipin जय गुगल !
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Maitreyee
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| Saturday, February 11, 2006 - 1:02 am: |
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बी अर्णव चा अर्थ वन / जंगल असा होत नाही 
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Vaatsaru
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| Saturday, February 11, 2006 - 1:37 am: |
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ANa-va mhNajao samaud` ro baI
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Bee
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| Saturday, February 11, 2006 - 7:27 am: |
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मैत्रेयी आणि वाटसरू तुम्ही दोघेही म्हणत असाल तर नक्कीच नसेल अर्णव म्हणजे वन जंगल. धन्यवाद! पसायदान मधे हा शब्द येतो. चेतना चिंतामनीचे गाव बोलते जे अर्णव पियुषाचे हो रे वाटसरू लागतो की अर्थ नीट आपल्या मराठी भाषेत नावापुढे जी लावायची प्रथा हिंदी अरब उर्दू अशा लोकांकडून घेतली आहे का? मला कुणी जी लावले की अमराठीच वाटते. त्यापेक्षा श्रीयुत, श्री, साहेब असे नावा आधी नंतर लावले की मराठी वाटते. आपल्या मराठी पोवाड्यातही जी जी जी जी असे खूपदा असते मला वाटत हे शिवाजी महारांच्या काळापासून सुरू झाले असावे आणि त्यावेळी आपल्या मुलखात मुसलमान अरबी लोकही बरीच होती ना. असो चुक भुल दे घे. तुम्ही म्हणाल हा बी काहीतरीच बरळत असतो नेहमी वाटसरू सांगायचे होते, तुम्ही पूर्वीसारखे काही लिहित नाही हल्ली.. येत जा हो साहेब
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Arch
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| Saturday, February 11, 2006 - 12:42 pm: |
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माझा नवरा म्हणतो पंजाबी लोक अरुणला अरणव म्हणतात. अरे ओ अरणव तू किथ्थे गयासी असच काहितरी. Sorry for tp राहवल नाही म्हणून लिहिल. 
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